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Monday, August 14, 2017

2019 नहीं, #MP विधानसभा के साथ होंगे लोकसभा चुनाव!

■ नई दिल्ली
अगर सबकुछ प्लानिंग के मुताबिक रहा तो अगले साल लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकते है। सूत्रों के मुताबिक अगले लोकसभा चुनाव 2018 के नवंबर-दिसंबर में करवाए जा सकते हैं। इसी दौरान मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के चुनाव प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि इस राजनीतिक परिवर्तन को समझने के लिए लोकसभा के पूर्व सेक्रेटरी जनरल सुभाष सी कश्यप और कई सचिवों की राय जानने की कोशिश की जा रही है।

6 महीने पहले
मौजूदा प्रावधान, जिसके अनुसार चुनाव तय समय से छह महीने पहले तक करवाए जा सकते हैं, की जांच की जा चुकी है। इसके अनुसार इसमें बदलाव के लिए संविधान में संशोधन जैसे जटिल रास्तों की जरूरत नहीं पड़ेगी। संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा, ‘आने वाले लोकसभा चुनावों और उसके बाद छह महीनों में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों को साथ करवाया जा सकता है। संविधान में ऐसा प्रावधान है कि तय समय से 6 महीने पहले तक चुनाव करवाए जा सकते हैं। यह काम चुनाव आयोग कर सकता है। इसके लिए किसी संविधान संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।’

आम सहमति बनाना मुश्किल
प्रधानमंत्री मोदी भी कई बार यह राय जाहिर कर चुके हैं कि लगातार होने वाले विधानसभा चुनावों से न सिर्फ सरकार की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है बल्कि इससे देश पर आर्थिक भार भी पड़ता है। प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग की अपील अगर तमाम राजनीतिक दल मान लेते हैं और समयपूर्व लोकसभा चुनाव पर वे एकमत हो जाते हैं तो कई राज्यों के विधानसभा चुनाव भी एकसाथ हो सकते हैं।

हो सकता है मोदी लहर का फायदा
अगले साल नवंबर-दिसंबर में खत्म हो रहे 4 विधानसभा (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) के कार्यकालों में महज मिजोरम ही है जहां बीजेपी सत्तासीन नहीं है। इसके अलावा ओडिशा में बीजेडी और आंध्र प्रदेश में टीडीपी को 2014 की मोदी लहर का फायदा जमकर हुआ था। इस वजह से इस बात की उम्मीद ज्यादा है कि लगभग सभी राज्यों में 'समयपूर्व' चुनाव की सहमति बन जाएगी

मोदी सरकार भी फूंक-फूंक कर रख रही है कदम
इधर चुनावों के मद्देनजर मोदी सरकार ने भी अपनी कार्यशैली में रणनीतिक बदलाव लाने का फैसला किया है। कंपनी बार्कले इंडिया की एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि मोदी सरकार अपने बचे कार्यकाल में शायद ही किसी महत्वपूर्ण सुधार पर ध्यान दे। वह अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने तथा अपेक्षाकृत कम करों के साथ लोकहितैषी दिखने की कोशिश कर सकती है।


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