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Sunday, August 13, 2017

संयुक्त सचिव पद पर प्रमोशन से पहले अफसरों का लें इंटरव्यू: स्टैंडिंग कमेटी

नई दिल्ली। सरकार में सीनियर पदों पर नियुक्ति से पहले संबंधित अधिकारी का इंटरव्यू होना चाहिए और उन्हें अपनी विशेषज्ञता के हिसाब से ही पोस्टिंग मिलनी चाहिए। अभी जो सिस्टम है, उसमें योग्यता और विशेषज्ञता का इनके लिए कोई पैमाना नहीं होता है। अगर गवर्नेंस में बेहतर नतीजे पाने हैं, तो इस दिशा में तुरंत बड़ा कदम उठाना होगा। सरकार को यह सुझाव एक संसदीय समिति ने दिए हैं।
संसद के मॉनसून सत्र में प्रशासनिक सुधार से जुड़े मसलों पर नीति तय करने के लिए बनी स्टैंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एक प्रस्ताव सरकार को दिया है। समिति ने सुझाव दिया है कि संयुक्त सचिव के रूप में प्रोन्नति देने से पहले सभी अधिकारियों का एक इंटरव्यू हो, जिससे उनकी विशेषज्ञता तय हो। इसके बाद आगे भविष्य में उनका प्रमोशन और नियुक्ति उसी अनुरूप हो। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद डीओपीटी सूत्रों के कहा कि प्रशासनिक सुधार के तहत इस बारे में पहले से विचार-विमर्श चल रहा है और संसद समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद निश्चित तौर पर इस दिशा में पहल तेज होगी। समिति ने डीओपीटी से संसद के अगले सत्र से पहले अपनी राय देने को कहा है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 7वें वेतन आयोग में प्रोन्नति और वेतन बढ़ोतरी में प्रदर्शन को पैमाना बनाया है। इसके तहत कहा गया है कि जिनका काम पैरामीटर पर खतरा नहीं उतरेगा, उनका अप्रेजल या इन्क्रिमेंट नहीं होगा। साथ ही, नियमित प्रमोशन पर भी इसका असर पड़ेगा। पहले गुड कैटिगरी में रहने पर वेतन बढ़ोतरी और प्रोन्नति मिलती थी, लेकिन अब इसके लिए वेरी गुड कर दिया।

360 डिग्री सिस्टम बनाने का निर्देश
संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि डीओपीटी अफसरों की नियुक्ति और प्रमोशन को लेकर 360 डिग्री सिस्टम पेश करने को कहा है। समिति ने सातवें वेतन आयोग के बाद उपजी आशंका को भी दूर करने के लिए उठाए कदम पर विभाग से राय मांगी है।

लैटरल एंट्री पर अंतिम फैसला पीएमओ में
वहीं, ब्यूरोक्रेसी में लैटरल एंट्री पर अब अंतिम फैसला पीएम नरेंद्र मोदी खुद लेंगे। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों के दल ने लैटरल एंट्री से जुड़े सभी पहलुओं को समेटते हुए अपनी रिपोर्ट दे दी है और अब आगे फैसला पीएमओ स्तर पर लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, भले ही नीतिगत रूप से इस पर औपचारिक नीति बने, लेकिन मोदी सरकार सैद्धांतिक रूप से सरकार के अंदर नीतिगत फैसले वाले पदों पर विशेषज्ञों की नियुक्ति करने पर सहमत है।


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