मुख्यमंत्री श्री बघेल का बजट भाषण : छत्तीसगढ़ विधानसभा रायपुर - KRANTIKARI SAMVAD

Breaking

Post Top Ad

Saturday, February 9, 2019

मुख्यमंत्री श्री बघेल का बजट भाषण : छत्तीसगढ़ विधानसभा रायपुर


 माननीय् अध्यक्ष महोदय,
1. नवंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की जनता ने भारी बहुमत के साथ हमें जो जनादेश दिया था, उसके प्रति पुनः आभार व्यक्त करता हूं। बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय की भावना के साथ, नयी सरकार का प्रथम बजट मैं आज सदन में प्रस्तुत कर रहा हूं। सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि जनता की गाढ़ी कमाई से एकत्र किये गये राजस्व की एक-एक पाई का उपयोग इस बजट के माध्यम से छत्तीसगढ़ की जनता की भलाई के कामों में किया जायेगा।
2. विधानसभा चुनाव के समय हमने प्रदेश के किसानों से, माताओं और बहनों से, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के सदस्यों से, तथा युवाओं और बच्चों से उनकी खुशहाली और तरक्की के वादे किये थे। हमने जन घोषणा पत्र में किसानों का कर्जा माफ करने और कृषि ऊपज का उचित मूल्य देने का वादा किया था। हमारी सरकार ने शासन संभालते ही उन वादों पर अमल शुरू कर दिया है और मुझे प्रसन्नता है कि इस बजट में भी उन सभी योजनाओं में समुचित प्रावधान किया गया है, जिनका सीधा लाभ प्रदेश की जरूरतमंद जनता और किसानों को मिलेगा।
3. महात्मा गांधी जी ने कहा था कि वास्तविक भारत गांव में बसता है। यदि गांव नहीं बचे तो देश भी नहीं बचेगा। यह बात आज भी सार्थक प्रतीत होती है। छत्तीसगढ़ की 75 फीसदी आबादी गाँव में निवास करती है और आज भी हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है। कृषि और किसानों के विकास से ही हमारे गाँव समृद्ध होंगे। इसी अवधारणा को लेकर हमारी सरकार का पहला बजट प्रदेश के किसानों और कृषि विकास के कार्यों पर केन्द्रित है। मानसून की अनिश्चितता एवं वर्षा आधारित कृषि ही हमारे प्रदेश में किसानों का भविष्य निर्धारित करती रही है। अधिकांश किसान खेती किसानी का काम अल्पकालीन कृषि ऋण लेकर करते हैं किन्तु समय पर वर्षा का पानी नहीं मिलने से फसलों का नुकसान तो झेलते ही हैं साथ ही कर्जा चुकाने का बोझ भी उन पर अलग से आता है।
4. कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग भारत सरकार की किसानों की आय दुगुनी करने के विषय पर गठित समिति की रिपोर्ट के वॉल्यूम दो में उल्लेख है कि वर्ष 2015-16 में अखिल भारतीय स्तर पर कृषक परिवार की अनुमानित औसत वार्षिक आय 96 हजार 703 रू. की तुलना में छत्तीसगढ़ के कृषक परिवार की आय मात्र 64 हजार थी। समिति का यह भी आकलन है कि छत्तीसगढ़ में धान की फसल से होने वाली आय में 2004-05 से 2008-09 की तुलना में 2009-10 से 2013-14 की अवधि में कमी आयी है। विचाराधीन अवधि में धान की पैदावार में बढ़ोत्तरी एवं उपार्जन मूल्य में वृद्धि के बावजूद किसान की आय में कमी का मुख्य कारण लागत मूल्य में वृद्धि होना है।
5. कृषि लागत मूल्य में कमी लाने के लिए हमारी सरकार ने पहला कदम उठाया है, किसानों को पुराने कर्जों के कुचक्र से मुक्ति दिलाने का। इसी उद्देश्य से हमारी सरकार ने ग्रामीण बैंक एवं सहकारी बैंकों के 6 हजार 230 करोड़ के अल्पकालीन कृषि ऋण को माफ करने का निर्णय पिछले 17 दिसम्बर को लिया था और अब हमने सार्वजनिक क्षेत्र के व्यावसायिक बैंकों से लिये गये लगभग
4 हजार करोड़ के अल्पकालीन कृषि ऋणों को भी माफ करने का निर्णय लिया है। कृषि ऋण की माफी के लिए तीसरे अनुपूरक बजट में हमारी सरकार ने 4 हजार 224 करोड़ की राशि का प्रावधान किया था और शेष राशि के लिए हमने इस बजट में भी समुचित प्रावधान किया है।
6. छत्तीसगढ़ राज्य की मुख्य फसल धान है और हमारे राज्य को तो धान का कटोरा ही कहते थे। किन्तु पूर्व सरकार की नीतियों सेे धान की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा हो गई। किसानों को धान का लागत मूल्य निकालना मुश्किल हो गया और दिनों-दिन उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी। इसीलिए हमने हमारे जन घोषणा पत्र में 2500 रू. प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी का वादा किया था। हमने अपने वादे को पूरा भी किया और खरीफ 2018 के धान को हमने किसानों से 2500 रू. की दर पर खरीदा। आने वाले वर्षों में भी हम अपने वादे पर कायम हैं और 2019-20 के बजट में भी 2500 रू. प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने के लिए समुचित राशि का प्रावधान किया गया है।
7. बजट में जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान करने के साथ-साथ गैर-जरूरी एवं प्रत्यक्ष लाभ न देने वाली योजनाओं के प्रावधानों में संशोधन पर भी विचार किया गया है। योजनाओं का समुचित परीक्षण करके हमने प्राथमिकता वाली योजनाओं के लिए अधिक वित्तीय संसाधन जुटाये है। साथ ही बजट घाटे को नियंत्रित रखने का भी युक्तियुक्त प्रयास किया है।
8.    आर्थिक स्थिति
8.1. अध्यक्ष महोदय, अब मैं राज्य की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा सदन के सामने प्रस्तुत करता हूँ। वर्ष 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार स्थिर दर पर वर्ष 2018-19 में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद मंें 6.08 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जो इसी अवधि के लिए अनुमानित अखिल भारतीय सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत की तुलना में कम है।
8.2. वर्ष 2018-19 में स्थिर भाव पर कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर 3.8 प्रतिशत की वृद्धि के विरूद्ध राज्य में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित हैै। राष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक क्षेत्र में 7.8 प्रतिशत वृद्वि दर की तुलना में राज्य में औद्योगिक क्षेत्र में 5.4 प्रतिशत वृद्वि, और सेवा क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि के विरूद्ध राज्य में सेवा क्षेत्र में वृद्वि दर 6.9 प्रतिशत अनुमानित है। इस प्रकार राज्य की औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र की अनुमानित वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर से कम रहना अनुमानित है।
8.3. राज्य का सकल घरेलू उत्पाद प्रचलित दर पर वर्ष 2017-18 में 2 लाख 84 हजार करोड़ से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 3 लाख 12 हजार करोड़ होना अनुमानित है, जो की पिछले वर्ष की तुलना में 9.66 प्रतिशत अधिक है।
8.4. वर्ष 2018-19 में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 17.21 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 47.17 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र का योगदान 35.63 प्रतिशत अनुमानित हैं।
8.5. वर्ष 2018-19 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 25 हजार 397 रू. अनुमानित है जबकि इसी अवधि में राज्य में प्रति व्यक्ति आय 96 हजार 887 रू. का अनुमान है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय में 11.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है जबकि राज्य स्तर पर वृद्वि 7.9 प्रतिशत अनुमानित है। इस प्रकार राज्य में प्रति व्यक्ति आय वृद्धि का प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर की तुलना में केवल दो-तिहाई के लगभग है।
9. अध्यक्ष महोदय, राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विकास दर की तुलना में राज्य की आर्थिक विकास दर कम है जिसमें बढ़ोत्तरी करने के लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हमें राज्य के आर्थिक विकास और लोगों की खुशहाली के लिए उपलब्ध संसाधनों का अधिक संवेदनशीलता के साथ बेहतर उपयोग और कड़ी मेहनत करने की जरूरत हैं। इस लोक कल्याणकारी बजट के माध्यम से हमारी सरकार कृषि क्षेत्र के साथ-साथ संपूर्ण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम करने का प्रयास कर रही हैं।
10. अध्यक्ष महोदय, इस बजट में हमने उन योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिनसे किसानों एवं अल्प आय वाले परिवारों को योजनाओं में प्रावधानित राशि का सीधा लाभ मिले। योजनाओं का पैसा सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचे। चाहे वो पैसा ऋण माफी का हो या धान प्रोत्साहन का। पैसा किसान के हाथ में मिले ताकि वो अपनी इच्छा से अपने अधूरे सपने पूरा कर सके। अपनी मर्जी से अपने बच्चों का सुनहरा भविष्य गढ़ सके। इस बजट में ऐसी योजनाओं के लिए राशि रखी गई है, जिनसे महिलाओं को सुरक्षा और आत्मनिर्भरता मिले तथा युवाओं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
11. अध्यक्ष महोदय, अब मैं इस बजट के कुछ महत्वपूर्ण एवं नये प्रावधानों के बारे में जानकारी देना चाहूँगा।
11.1. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए धान उत्पादन पर प्रोत्साहन योजना में 2500 रू. प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी हेतु 5 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है।
11.2. ग्रामीण बैंक एवं सहकारी बैंकों के कृषि ऋण के साथ-साथ हमारी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के व्यवसायिक बैंकों द्वारा बांटे गये अल्पकालीन कृषि ऋण को भी माफ करने का फैसला लिया है। बजट में किसानों का कृषि ऋण माफ करने के लिए 5 हजार करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
11.3. गरीब परिवारों को भरपेट भोजन की व्यवस्था के लिए हमारी सरकार ने प्रत्येक राशन कार्ड पर 35 किलो चावल देने का निर्णय लिया है। इसके लिए मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना में 4 हजार करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
11.4. घरेलू उपभोक्ताओं का बिजली बिल हाफ करने की दृष्टि से विद्युत देयकों में 400 यूनिट तक विद्युत व्यय-भार पर आधी छूट का लाभ सभी घरेलू उपभोक्ताओं को देने का निर्णय लिया गया है। इस छूट का लाभ 1 मार्च 2019 से दिया जायेगा और उपभोक्ताओं को अप्रैल माह में मिलने वाले बिजली बिल पर आधी छूट का लाभ मिलेगा। इसके लिए बजट में 400 करोड़ का नवीन मद में प्रावधान किया गया है।
11.5. जनप्रतिनिधियों को उनके विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए अधिक जवाबदेही के साथ काम करने का अवसर देने के उद्देश्य से विधायक निधि की राशि 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए बजट में 182 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।
11.6. पुलिस विभाग में जिला कार्यपालिक बल के आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के अमले को रिस्पान्स भत्ता देने के लिए 45 करोड़ 84 लाख का प्रावधान किया गया है।
11.7. प्रदेश में उत्पादित खाद्य-पदार्थ, फल-फूल एवं सब्जियों के प्रसंस्करण को प्रोत्साहित कर किसानों के लिए अधिक आय एवं रोजगार सृजन करने के उद्देश्य से प्रथमतः 5 नये फूड पार्क प्रारंभ करने के लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
11.8. आश्रम एवं छात्रावासों में रहने वाले प्री-मैट्रिक स्तर के अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिष्यवृत्ति की राशि 900 रू. प्रति माह से बढ़ाकर 1000 रू. प्रति माह, तथा पोस्ट मैट्रिक छात्रों के लिए भोजन सहायता की राशि 500 रू. प्रति माह से बढ़ाकर 700 रू.प्रति माह की गई है। इसके लिए 27 करोड़ 57 लाख का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
11.9. स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन कार्यक्रम में खाना बनाने वाली रसोईयों को 1200 से बढ़ाकर 1500 रू. प्रति माह मानदेय दिया जायेगा। इसके लिए बजट में 26 करोड़ 59 लाख का अतिरिक्त प्रावधान है।
11.10. वन्य प्राणियों द्वारा जनहानि होने पर क्षतिपूर्ति की राशि 4 लाख से बढ़ाकर 6 लाख करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए बजट में 35 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
11.11. गिरौदपुरी एवं भंडारपुरी के समन्वित विकास के लिए 5 करोड़ एवं दामाखेड़ा के समन्वित विकास के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages