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Monday, April 8, 2024

KJS Cement के MD पवन अहलूवालिया पर FIR:फर्जी तरीके से पत्नी और बेटियों के नाम ट्रांसफर की कंपनी की हिस्सेदारी

 KJS Cement के MD पवन अहलूवालिया पर FIR:फर्जी तरीके से पत्नी और बेटियों के नाम ट्रांसफर की कंपनी की हिस्सेदारी

KJS Cement MD Pawan Ahluwalia FIR: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गत सप्ताह केजेएस सीमेंट के MD पवन अहलूवालिया सहित कंपनी के अन्य डायरेक्टर्स के खिलाफ FIR दर्ज कर विवेचना शुरू की है।


KJS Cement MD Pawan Ahluwalia FIR: दिल्ली और मध्यप्रदेश के बड़े उद्योगपति व केजेएस सीमेंट के MD पवन अहलूवालिया भी EOW की रडार पर आ गए। उनके खिलाफ जालसाजी के मामाले में FIR दर्ज की गई है। अहलूवालिया पर पत्नी और बेटियों के नाम फर्जी तरीके से कंपनी के शेयर ट्रांसफर करने का आरोप है। EOW ने उनकी पत्नी सहित अन्य डायरेक्टर्स को भी सहआरोपी बनाया है।

हिमांगिनी ने EoW को बताया कि पवन अहलूवालिया ने पद का दुरुपयोग किया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को अपने प्रभाव में लेकर उन्होंने मनमानी निर्णय पारित कराए और 2007 में कमलजीत सिंह अहलूवालिया को न केवल निदेशक पद से हटा दिया, बल्कि साजिश के तहत कंपनी में उनकी शेयरधारिता कम की है।

शिकायतकर्ता हिमांगिनी सिंह पवन अहलूवालिया की भतीजी और कमलजीत सिंह अहलूवालिया की बेटी हैं। उन्होंने चाचा पवन अहलूवालिया और चाची इंदु अहलूवालिया समेत कई लोगों पर जालसाजी कर कंपनी के शेयर हड़पने और दिवंगत केजेएस अहलूवालिया की कंपनी में हिस्सेदारी कम करने का आरोप लगाया है।

पवन-इंदू व भल्ला सहित अन्य पर FIR
हिमांगिनी की शिकायत पर EoW ने केजेएस सीमेंट के एमडी पवन अहलूवालिया, उनकी पत्नी इंदु अहलूवालिया और संजीव भल्ला सहित कंपनी के कई निदेशकों के खिलाफ धारा 406, 409, 420, 468, 471 एवं 120 बी के तहत केस दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू की टीम अब मामले की जांच करेगी।

FIR में यह आरोप केजेएस ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन रहे स्व कमलजीत सिंह अहलूवालिया की पुत्री हिमांगिनी सिंह ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW)शिकायत दर्ज कराई है।
हिमांगिनी ने बताया कि केजेएस के डायरेक्टर पवन अहलूवालिया ने 8 जून 2017 को कमलजीत सिंह अहलूवालिया का एक जाली त्याग-पत्र तैयार कर उन्हें निदेशक पद से हटाया था।
साथ ही 27 सितंबर 2017 को फर्जी गिफ्ट डीड के जरिए 26, 78, 572 इक्विटी शेयरों को पत्नी इंदु, बेटी शिवांगी और मेधा के नाम ट्रांसफर कर दिए। इसके पहले इस तरह का फर्जीवाड़ा कर इन इक्विटी शेयरों को डिबेंचर से इक्विटी में बदला और करोड़ों रुपए वसूले थे।

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