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Friday, August 30, 2024

हेमा कमेटी रिपोर्ट पर Shanti Priya का फूटा गुस्सा, कहा- 'मोहनलाल को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था'

 हेमा कमेटी रिपोर्ट पर Shanti Priya का फूटा गुस्सा, कहा- 'मोहनलाल को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था'


मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में हेमा कमेटी रिपोर्ट से मची हड़कंप के बीच दिग्गज अभिनेता मोहनलाल (Mohanlal) ने एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स के प्रेसीडेंट के पद से इस्तीफा दे दिया था। मोहनलाल के इस्तीफे के बाद साउथ की जानी-मानी अदाकारा शांति प्रिया (Shanti Priya) ने नाराजगी जाहिर की है। शांति का कहना है कि मोनलाल को यूं इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।


एक रिपोर्ट ने पूरे मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के तोते उड़ा दिए हैं। हेमा कमेटी रिपोर्ट (Hema Committee Report) में महिला कलाकारों के साथ यौन उत्पीड़न और कास्टिंग काउच के जिक्र ने कई दिग्गज सितारों को मुसीबत में डाल दिया है। एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) के भी कई सदस्यों पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं।

रंजीत और सिद्दीकी पर लगे यौन शोषण के आरोप के बाद उन्हें AMMA से इस्तीफा देना पड़ा। इसके चलते मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और AMMA के प्रेसीडेंट मोहनलाल भी विवादों में घिर गए। लगातार उनकी आलोचना हो रही थी, जिसके बाद उन्होंने बीते दिनों एसोसिएशन से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे से दिग्गज अभिनेत्री शांति प्रिया (Shanti Priya) खुश नहीं हैं।

मोहनलाल के इस्तीफे पर उठाया सवाल

शांति प्रिया ने सवाल उठाया है कि मोहनलाल के इस्तीफे से यौन उत्पीड़न के मामले पर क्या प्रभाव पड़ा है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में अभिनेत्री ने कहा, "इसका कोई मतलब नहीं था। मोहनलाल को अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। वह वाकई पीड़ितों का समर्थन कर सकते थे, उनका मार्गदर्शन कर सकते थे और वर्तमान पीढ़ी के लिए मौजूद रह सकते थे।"




शांति प्रिया ने आगे कहा, "वह वहां मौजूद रह सकते थे और कह सकते थे 'हां हम वहां हैं, हम पर भरोसा करें, कृपया अपनी आवाज उठाएं और हमसे बात करने आएं,' यही दृष्टिकोण होना चाहिए था। वह पीड़ितों और नए लोगों के लिए एक स्तंभ बन सकते थे।"

यौन शोषण पर क्या बोलीं शांति प्रिया?

शांति प्रिया का कहना है कि मलयालम या बॉलीवुड ही नहीं बल्कि हर जगह हैरसमेंट हो रहे हैं और इससे आदमी भी अछूते नहीं हैं। बकौल अभिनेत्री, "मैं पैन इंडिया एक्ट्रेस हूं और यह चीजें सभी इंडस्ट्री में होती है। अभी सिर्फ मलयालम और बॉलीवुड का बाहर आ गया। दो साल बाद कोई तेलुगु इंडस्ट्री से आ सकता है और ऐसा कुछ कह सकता। यह कब रुकेगा? सभी ने अपनी आवाज उठाई है और अपनी चिंताएं जाहिर की हैं लेकिन अब सवाल यह उठता है कि कितनी सख्त कार्रवाई की जाएगी और इसमें कितना समय लगेगा जब हमारी आने वाली पीढ़ियों को चिंता करने की जरूरत नहीं होगी।"

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