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Friday, December 27, 2024

अमेरिका से न्यूक्लियर डील के लिए अड़ गए थे मनमोहन... तारीफ करते हुए बोले ओबामा- 'आप कहते हैं, तो दुनिया सुनती है'

  अमेरिका से न्यूक्लियर डील के लिए अड़ गए थे मनमोहन... तारीफ करते हुए बोले ओबामा- 'आप कहते हैं, तो दुनिया सुनती है'


डॉ. मनमोहन सिंह ने गुरुवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन पर 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। मनमोहन सिंह को आर्थिक सुधारों के लिए जितना श्रेय दिया जाता है उतना ही अमेरिका से हुई न्यूक्लियर डील के लिए भी याद किया जाएगा। राजनीतिक विरोध के बावजूद मनमोहन सिंह इस डील के लिए अड़ गए थे।

डील के बाद भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत होते गए (फोटो: पीटीआई)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का दिल्ली एम्स में गुरुवार को निधन हो गया। देश के आर्थिक सुधारों के लिए महमोहन सिंह को विशेष श्रेय दिया जाता है। उनके निधन पर 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।


मनमोहन सिंह की तारीफ में एक बार तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था- 'जब मनमोहन सिंह बोलते हैं, तो पूरी दुनिया सुनती है।' ओबामा ने अपनी किताब 'A Promised Land' में भी काफी तारीफ की थी। उन्होंने डॉ. सिंह को भारत की अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण के इंजीनियर बताया था।


न्यूक्लियर डील का था विरोधआर्थिक सुधारों से इतर डॉ. मनमोहन सिंह को राजनीतिक विरोध के बावजूद अमेरिका से न्यूक्लियर डील लाने के भी याद किया जाता है। 18 जुलाई 2005 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के साथ मनमोहन सिंह ने डील की रूपरेखा पर संयुक्त घोषणा की थी।

लेकिन औपचारिक रूप से यह डील 2008 में हुई। तब मनमोहन सिंह को देश की कमान संभालते 39 महीने हो गए थे। डील के विरोध में सिर्फ विपक्ष ही नहीं, कांग्रेस के अंदर भी विरोध के स्वर थे। खुद सोनिया गांधी इसके खिलाफ थीं।

अड़ गए थे मनमोहन सिंहलेफ्ट फ्रंट ने विरोध में सरकार से समर्थन खींच लिया। लेकिन मनमोहन सिंह ने निश्चय कर लिया था। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की मदद से वह कुछ दलों को मनाने में सफल रहे थे। तब समाजवादी पार्टी ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया था।



(फोटो: पीटीआई)

तमाम विरोध के बावजूद मनमोहन सिंह इस डील के लिए अड़ गए थे और उन्होंने यह पूरा कर दिखाया। संजय बारू की किताब 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में उन्होंने लिखा है कि 'परमाणु समझौते पर डॉ. मनमोहन के रुख से सोनिया गांधी के अधीनता वाली उनकी छवि लोगों की सोच से मिट गई। अंत में मनमोहन सिंह राजा थे।'

अमेरिका से सुधरे संबंधइस डील से भारत और अमेरिका के संबंध भी प्रगाढ़ होते चले गए। 1998 में पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे, जो अब समाप्त हो गए थे। इस डील ने न्यूक्लियर क्लब में भारत को ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

डील के करीब दो साल बाद कनाडा के टोरंटो में जी20 समिट का आयोजन हो रहा था। तब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मनमोहन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा था कि 'मैं कह सकता हूं कि यहां जी20 में जब प्रधानमंत्री बोलते हैं, तो लोग सुनते हैं।'

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