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Friday, October 31, 2025

'हत्या' के आरोप में भारतीय मूल के सुब्रमण्यम वेदम ने जेल में काटे 43 साल, अब डिपोर्टेशन का भी संकट

 'हत्या' के आरोप में भारतीय मूल के सुब्रमण्यम वेदम ने जेल में काटे 43 साल, अब डिपोर्टेशन का भी संकट




भारतीय मूल के सुब्रमण्यम वेदम को दोस्त की हत्या के आरोप से मुक्त होने में 43 साल लगे, पर अब डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। अगस्त में उनकी सजा रद्द हुई क्योंकि नए सबूत मिले थे। वेदम को 1999 के डिपोर्टेशन आदेश के तहत हिरासत में लिया गया है। वकील अब ड्रग्स के आरोपों को उनकी गलत कारावास से कम महत्व देने की कोशिश कर रहे हैं। वेदम ने जेल में कई डिग्रियां हासिल कीं।




भारतीय मूल के वेदम ने काटी 43 साल की सजा।

 भारत में जन्मे सुब्रमण्यम वेदम को 1980 में अपने दोस्त थॉमस किनसर की कथित हत्या के मामले में खुद को निर्दोष साबित करने के लिए चार दशक से भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ा। हालांकि, उन्हें 43 साल जेल में भी बिताने पड़े।


इसी महीने वह पेन्सिलवेनिया की जेल से रिहा होने वाले थे। मगर, शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 64 साल के वेदम, जो नौ महीने की उम्र में कानूनी तौर पर भारत से अमेरिका आए थे, अब एक और मुश्किल कानूनी लड़ाई का सामना कर रहे हैं।


अगस्त में हुई सजा रद

गवाहों या हत्या के पीछे के कारणों की कमी के बावजूद वेदम को दो बार हत्या का दोषी ठहराया गया था। हालांकि, अगस्त में एक जज ने उनकी सजा को रद कर दिया था, जब उनके वकीलों को नए सबूत मिले जिसके बारे में प्रोसिक्यूटर ने कभी नहीं बताए थे। जब वेदम की बहन तीन अक्टूबर को उन्हें घर लाने की तैयारी कर रही थी, तो उन्हें 1999 के डिपोर्टेशन आर्डर के तहत हिरासत में ले लिया गया।


बहरहाल, ट्रंप प्रशासन के बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन अभियान के बीच वेदम के वकीलों को इम्मिग्रेशन कोर्ट को यह समझाना होगा कि 1980 के दशक में ड्रग्स लेने के आरोप में मिली सजा को उन वर्षों से ज्यादा अहमियत नहीं दी जानी चाहिए जो उन्होंने गलत तरीके से जेल में बिताए। कुछ समय के लिए इम्मिग्रेशन कानून उन लोगों को ऐसी रियायत मांगने की इजाजत देता था जिन्होंने अपनी जिंदगी सुधार ली थी। उस समय हत्या के आरोप में सजा होने की वजह से वेदम कभी ऐसा नहीं कर पाए।

'बड़ा अन्याय सहने वाले इंसान'

इम्मिग्रेशन वकील एवा बेनाच ने कहा, ''वह एक ऐसे इंसान हैं जिन्होंने बहुत बड़ा अन्याय सहा है। वे 43 साल जेल में खाली नहीं बैठे थे। उन्होंने जेल में एक शानदार अनुभव जिया।" वेदम ने जेल में रहते हुए कई डिग्रियां हासिल कीं, सैकड़ों साथी कैदियों को पढ़ाया। उनके वकीलों को उम्मीद है कि इम्मिग्रेशन जज उनके पूरे मामले पर विचार करेंगे। वेदम अभी भी सेंट्रल पेन्सिलवेनिया में 1,800 बेड वाली यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट फैसिलिटी में हैं।

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