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Wednesday, October 29, 2025

Mohammad Rizwan ने खड़ा किया नया बखेड़ा, ODI कप्तानी छिनी तो PCB को दिखाया ठेंगा! जमकर हो रही फजीहत

 Mohammad Rizwan ने खड़ा किया नया बखेड़ा, ODI कप्तानी छिनी तो PCB को दिखाया ठेंगा! जमकर हो रही फजीहत



Mohammad Rizwan: मोहम्मद रिजवान ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। वह वनडे कप्तानी छीने जाने और टी20 टीम से बाहर किए जाने से नाराज हैं। रिजवान ने कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने के लिए कुछ मांगें रखी हैं, जिनमें सीनियर खिलाड़ियों को कैटेगरी ए में शामिल करना और नए कप्तान को बोर्ड के हस्तक्षेप के बिना पूर्ण स्वतंत्रता देना शामिल है।



Mohammad Rizwan ने क्यों सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने से मना किया?


 Mohammad Rizwan Central Contract: पाकिस्तान क्रिकेट में एक नया विवाद पैदा हो गया है। इसके पीछे की वजह है विकेटकीपर बैटर मोहम्मद रिजवान की बगावत। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिससे ये पता चला है कि वनडे कप्तानी छीनने के बाद से रिजवान काफी नाराज है और उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पर ही साइन करने से इनकार कर दिया है। बता दें कि कुल 30 पाकिस्तानी खिलाड़ी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में शामिल किए गए, लेकिन, उस कॉन्ट्रैक्ट पर रिजवान ही अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने उस पर साइन नहीं किया है।

Mohammad Rizwan ने क्यों सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने से मना किया?

मोहम्मद रिजवान (Mohammad Rizwan) की इस नाराजगी की वजह ये मानी जा रही है कि उन्हें पाकिस्तान की T20 टीम से ड्रॉप किया गया और वनडे की कप्तानी उनसे छीनी गई, जिसके बाद वह पीसीबी के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट (PCB Central Contract) पर साइन करने से इनकार कर रहे हैं। इसस पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से खुद को T20 टीम से निकाले जाने पर उन्होंने सवाल पूछे।


पाकिस्तान की लोकल मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद रिजवान को T20 टीम से निकाले जाने पर तो आपत्ति है ही, लेकिन उसके अलावा उन्होंने पीसीबी के आगे कुछ अतिरिक्त डिमांड भी की, जिनके बिना वे कॉन्ट्रैक्ट पर साइन नहीं करेंगे।


पहली डिमांड है कि सीनियर और अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को तुरंत Category A में वापस शामिल किया जाए।

दूसरी डिमांड है कि नई नियुक्त होने वाले कप्तान को तय कार्यकाल और पूरी छूट दी जाए, ताकि वे बिना बोर्ड दखल के अपनी योजना लागू कर सकें।

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