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Wednesday, December 24, 2025

102 डिग्री के तेज बुखार में Mohammed Rafi ने गाया था ये गाना, 64 साल बाद भी सुना जाता है ये गीत

 102 डिग्री के तेज बुखार में Mohammed Rafi ने गाया था ये गाना, 64 साल बाद भी सुना जाता है ये गीत




Mohammed Rafi Birth Anniversary 2025: हिंदी सिनेमा के दिग्गज सुरों के सरताज मोहम्मद रफी की आज 101 भी बर्थ एनिवर्सरी मनाई जा रही है। इस खास मौक पर हम आ ...और पढ़ें





बुखार में मोहम्मद रफी ने गाया था ये गाना (फोटो क्रेडिट- एक्स)



64 साल बाद भी अमर है रफी साहब का ये गाना


 24 दिसंबर 1924 को हिंदी सिनेमा के असली सुरों के सरताज मोहम्मद रफी साहब का जन्म हुआ था। पंजाब के अमृतसर के गांव कोटला सुल्तान सिंह में जन्में रफी साहब फिल्मी दुनिया की सबसे जादुई आवाज माने गए। आज उनकी 101वीं बर्थ एनिवर्सरी मनाई जा रही है। इस आधार पर हम आपके लिए मोहम्मद रफी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा लेकर आए हैं, जिसके बारे में जानकार आपको हैरान होगी और गायक के लिए आपके दिल में जगह काफी बढ़ जाएगी।


मोहम्मद रफी ने 64 साल पहले 102 डिग्री बुखार में एक आइकॉनिक सॉन्ग रिकॉर्ड किया था, जिसे श्रोता आज भी सुनना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं कि वह क्लट गाना कौन सा है।
तेज बुखार में गाया था ये गाना

लगभग 4 दशक के सिंगिंग करियर के दौरान ने मोहम्मद रफी ने कई शानदार गीतों को अपनी आवाज दी और वह सुपरहिट रहे। लेकिन एक गीत ऐसा था, जिसकी रिकॉर्डिंग के वक्त रफी साहब ठीक हालात में नहीं थे। तेज बुखार में उनका बदन तप रहा था और अपने जज्बे का नाजारा पेश करते हुए उन्होंने फिर भी वह गाना गाया।





जरा सोचिए की 102 डिग्री बुखार में कोई शख्स ठीक से बोल नहीं पाता है, ऐसी परिस्थिती में अगर कोई गायक गीत गाता है तो ये उसके कर्म समर्पण की मिसाल को कायम करता है। दरअसल मोहम्मद रफी के जिस गीत के बारे में इस लेख में जिक्र किया जा रहा है वह अभिनेता धर्मेंद्र की फिल्म शोला और शबनम का था।


गाने के बोल थे- जाने क्‍या ढूंढती रहती हैं ये आंखें मुझमें...(Jane Kya Dhoondti Rehti Hain Yeh Aankhen Mujh Mein Song)। आईएमडीबी की रिपोर्ट के अनुसार इस गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान रफी साहब की तबीयत काफी खराब थी, लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी सेहत की परवाह किए बिना इस गाने को रिकॉर्ड किया, ताकि संगीतकार और निर्मातओं का कोई नुकसान न हो जाए।

रफी साहब ने साढे़ तीन मिनट तक गाया गाना

साढे़ तीन मिनट के इस गाने को बुखार में भी मोहम्मद रफी ने शानदार तरीके से गाया था। इसका अंदाजा आप गाने को सुनकर आसानी से लगा सकते हैं। हालांकि, जिस तरह की गाने की परिस्थिती थी, उसके आधार पर रफी साहब की दबी और भरी हुई आवाज ने इसमें जान फूंक दी थी। बता दें इस सॉन्ग को बॉलीवुड और मोहम्मद रफी के बेस्ट सैड सॉन्ग में गिना जाता है।

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