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Saturday, December 27, 2025

भोपाल की सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे बीमार, जांच में 10 ड्राइवरों को कैंसर के लक्षण; रिपोर्ट में कई खुलासे

 भोपाल की सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे बीमार, जांच में 10 ड्राइवरों को कैंसर के लक्षण; रिपोर्ट में कई खुलासे



भोपाल-इंदौर रोड पर बस, टैक्सी और ऑटो चालकों की सेहत की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भोपाल ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, 10 ड्राइवरों मे ...और पढ़ें



भोपाल में जांच में 10 ड्राइवरों को कैंसर के लक्षण। (प्रतीकात्मक तस्वीर)


मध्य प्रदेश में वाहन चालकों की सेहत को लेकर एक अहम खुलासा हुआ है। भोपाल–इंदौर रोड पर बस, टैक्सी और ऑटो चालकों की सेहत को लेकर भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने की जांच कराई, जिसके परिणाम चौंकाने वाले निकले।


रिपोर्ट में पाया गया है कि 10 ड्राइवरों में फर्स्ट स्टेज मुंह के कैंसर के लक्षण पाए गए, वहीं करीब एक चौथाई ड्राइवरों में आंखों की दिक्कत देखने को मिली है। यह सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि पुलिस इन ड्राइवरों का उपचार भी करवा रही है।


बीमारी बन रही हादसों की वजह

चूंकि भोपाल-इंदौर रूट काफी व्यस्त रूट्स में से एक माना जाता है। यहां गर घंटे 5 से 6 हजार चार चक्का वाहनों की आवाजाही होती रहती है। सबसे बड़ी समस्या है कि बीमारी के बाद भी कई चालक वाहन चला रहे हैं। इस कारण हादसों की संभावना बनी रहती है।


इसको लेकर एसीपी ट्रैफिक विजय दुबे का कहना है कि सड़क पर हादसों को रोकने की पहल की गई है। शनिवार को भी यह जांच जारी रखी जाएगी।
चालकों की सेहत पर बढ़ी चिंता

बता दें कि इस दौरान वाहन ड्राइवरों की जांच में कुल 219 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जांच के नतीजों में पाया गया कि करीब हर चौथा ड्राइवर किसी न किसी विजन संबंधी समस्या से प्रभावित है। वहीं, करीब 23 प्रतिशत चालकों को इलाज, चश्मे या आगे की जांच के लिए रेफर करने की जरूरत पड़ी।


50 ड्राइवरों को आई ड्रॉप्स दी गईं, 25 को चश्मा लगाने की सलाह दी गई, जबकि 15 ड्राइवरों में मोतियाबिंद के शुरुआती लक्षण पाए गए। इसके अलावा 22 मामलों में अन्य कारणों से रेफरल किया गया।
आंकड़ों में समझें समस्या की गंभीरता

डेंटल जांच में स्थिति और गंभीर रही। करीब 78 प्रतिशत ड्राइवरों को दांतों के इलाज की जरूरत पाई गई। हर चार में से एक ड्राइवर को दांत निकलवाने की सलाह दी गई, हर सातवां ड्राइवर आरसीटी कैटेगरी में आया, हर छठे ड्राइवर को स्केलिंग की आवश्यकता बताई गई और 15 प्रतिशत से अधिक मामलों में फिलिंग जरूरी पाई गई।

सड़क सुरक्षा से जुड़ा है ड्राइवरों का स्वास्थ्य

विशेषज्ञों का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट ड्राइवर रोजाना सैकड़ों यात्रियों की जिम्मेदारी उठाते हैं। आंखों की कमजोरी, मोतियाबिंद या दांतों का लगातार दर्द ड्राइवर की एकाग्रता और क्षमता को प्रभावित करता है। लंबी दूरी की ड्राइविंग के दौरान ये समस्याएं दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में यह साफ है कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों और चालान तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्राइवरों की सेहत से भी इसका सीधा संबंध है।

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