धान की बेहतर कीमत ने बढ़ाया किसान युगल का हौसला - KRANTIKARI SAMVAD

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Saturday, December 20, 2025

धान की बेहतर कीमत ने बढ़ाया किसान युगल का हौसला

 धान की बेहतर कीमत ने बढ़ाया किसान युगल का हौसला

धान की बेहतर कीमत ने बढ़ाया किसान युगल का हौसला

साढ़े सात एकड़ की खेती से संवर रहा परिवार का भविष्य\

साढ़े सात एकड़ की खेती से संवर रहा परिवार का भविष्य

छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों और समर्थन मूल्य पर सुदृढ़ धान खरीदी व्यवस्था ने प्रदेश के किसानों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास का नया संचार किया है। शासन द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी तथा समय पर भुगतान से किसानों का खेती के प्रति भरोसा और उत्साह दोनों बढ़ा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ग्राम फेकारी के प्रगतिशील किसान श्री युगल किशोर साहू हैं, जिनकी मेहनत और शासन की नीतियों के समन्वय से परिवार का भविष्य उज्ज्वल हो रहा है।

       दुर्ग जिले के ग्राम फेकारी निवासी किसान श्री युगल किशोर साहू ने बताया कि वे लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं। इस वर्ष शासन द्वारा की गई बेहतर व्यवस्थाओं के चलते उन्होंने अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेची, जिससे उन्हें संतोषजनक और सुरक्षित आय प्राप्त हुई। उनके चेहरे पर दिखती मुस्कान खेती से मिली आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की कहानी स्वयं बयां करती है।

       श्री साहू ने बताया कि खेती से प्राप्त आय का उपयोग वे परिवार के सामाजिक और घरेलू दायित्वों को पूरा करने में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आय से वे नए घर का निर्माण कार्य पूर्ण कर रहे हैं। साथ ही बच्चों के विवाह, छट्ठी जैसे पारिवारिक आयोजनों का खर्च भी अब बिना किसी आर्थिक दबाव के आसानी से वहन कर पा रहे हैं।

       खेती में नवाचार और विविधीकरण की सोच को अपनाते हुए श्री युगल किशोर साहू केवल धान तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि धान के साथ-साथ वे चना, मटर और लाखड़ी (तिवड़ा) जैसी दलहन फसलों की खेती भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिल रही है और खेती का जोखिम भी कम हुआ है।

       किसान श्री युगल किशोर साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पहले की तुलना में अब धान की कहीं बेहतर कीमत मिल रही है। 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी से किसानों को सीधा और बड़ा लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि शासन की इन नीतियों से किसान अब पहले से कहीं अधिक आर्थिक रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और संतुष्ट महसूस कर रहे हैं।

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