दंडकारण्य का 'सीक्रेट डॉक्टर', कौन था जंगल के अंधेरे में माओवादियों का इलाज करने वाला सर्जन? - KRANTIKARI SAMVAD

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Monday, December 29, 2025

दंडकारण्य का 'सीक्रेट डॉक्टर', कौन था जंगल के अंधेरे में माओवादियों का इलाज करने वाला सर्जन?

 दंडकारण्य का 'सीक्रेट डॉक्टर', कौन था जंगल के अंधेरे में माओवादियों का इलाज करने वाला सर्जन?



दंडकारण्य के जंगलों में माओवादियों का इलाज करने वाले 'डॉ. रफीक' का असली नाम मंदीप है। पंजाब से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने वाले मंदीप ने घने जंगलों ...और पढ़ें




माओवादियों का इलाज करने वाले डॉ. रफीक की कहानी। फाइल फोटो

दंडकारण्य के घने जंगलों में शिविर लगे थे, जहां टॉर्च की रोशनी में एक डॉक्टर ने माओवादी के सीने में लगी गोली निकाली थी। घने जंगल में हुए इस ऑपरेशन की भनक लोगों को लगी, तो गुमनाम डॉक्टर को 'डॉ. रफीक' का नाम दिया गया। हालांकि, खुफिया फाइलों में भी उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है।


अब आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने 'डॉ. रफीक' से जुड़े कई खुलासे किए हैं। 'डॉ. रफीक' का असली नाम मंदीप है, जिसने पंजाब से MBBS की डिग्री हासिल की थी। माओवादी संगठन का हिस्सा बनने वाला वो अकेला उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति है, जिसने दंडकारण्य में कई माओवादियों को मौत के मुंह से बाहर निकाला है।


पूर्व माओवादी ने खोली पोल

पूर्व माओवादी एम वेंकटराजु उर्फ सीएनएन चंदू के अनुसार, 'डॉ. रफीक' ने कई माओवादियों का इलाज किया है। उसने इमरजेंसी सर्विस करने से लेकर पैरामेडिक्स सेवाएं, घाव, मलेरिया, सांप काटने और गैस्ट्रोएंटेराइटिस तक का उपचार किया है।


टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान चंदू ने बताया, "'डॉ. रफीक' ने स्थानीय लोगों और कई माओवादियों को भी गोली लगने पर उपचार करने, टांके लगाने और गोली निकालने की ट्रेनिंग दी थी।"
2013 में हुआ था खुलासा

खुफिया अधिकारियों के अनुसार, 2016 में 'डॉ. रफीक' दंडकारण्य से झारखंड चला गया था और वो आज भी सुरक्षाबलों की नजरों से ओझल है। उसका जिक्र पहली बार 2013 में सामने आया था। तब उसे 'सीक्रेट डॉक्टर' का नाम दिया गया था। 2018 में उसकी पत्नी रिंकी का नाम भी सामने आया था। 'डॉ. रफीक' ने कथित तौर पर खूंखार माओवादी कमांडर प्रशांत बोस का भी इलाज किया था।

फरार डॉक्टर की तलाश जारी

चंदू का कहना है कि स्थानीय लोग 'डॉ. रफीक' को भगवान की तरह पूजते थे। दूर-दराज से लोग सिर्फ उससे मिलने आते थे। छोटी खरोंच से लेकर बड़े बुखार के इलाज के लिए लोग 'डॉ. रफीक' पर ही निर्भर थे। उसने आदिवासी पुजारियों से जड़ी-बूटियों की भी जानकारी ली थी, जिनका इस्तेमाल वो इलाज के लिए करता था। 'डॉ. रफीक' आज भी फरार है और जांच एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं।

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