वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का 1 फरवरी 2025 को बजट पेश करेंगी। उनका बजट में फोकस राजकोषीय घाटे को कम करने पर रहेगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि बजट में गरीबों और जरूरतों का भी खास ख्याल रखा जाएगा। केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से कम रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू और अगले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है।HIGHLIGHTSवित्त मंत्रालय ने कहा-सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने पर रहेगा जोर।
गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को किया जाएगा मजबूत।
सरकार गुणवत्तापूर्ण व्यय में सुधार, सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.5 प्रतिशत पर लाने पर अपना ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगी। केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में घोषित राजकोषीय समेकन के सुगम मार्ग पर चलने और वित्त वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.5 प्रतिशत से कम रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 के तहत प्राप्तियों व व्यय के रुझानों और सरकार के दायित्वों को पूरा करने में विचलन की अर्धवार्षिक समीक्षा पर दी। इसे पिछले सप्ताह लोकसभा में रखा गया था। अर्धवार्षिक समीक्षा में कहा गया, 'सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने पर जोर दिया जाएगा, साथ ही गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा। यह दृष्टिकोण देश के वृहद-आर्थिक बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने में मदद करेगा और समग्र वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा।'
बयानों के अनुसार, बजट 2024-25 यूरोप तथा पश्चिम एशिया में युद्धों के कारण उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितताओं की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया जाएगा। भारत की सुदढ़ वृहद आर्थिक बुनियाद ने देश की वैश्विक अर्थव्यवस्था को, प्रभावित करने वाली अनिश्चितताओं से बचाया है।
कुल व्यय 48.21 लाख करोड़ रुपये अनुमानित
वित्त वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान (बीई) के अनुसार, कुल व्यय करीब 48.21 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें से राजस्व खाते और पूंजी खाते पर व्यय क्रमश: लगभग 37.09 लाख करोड़ रुपये और 11.11 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। कुल व्यय 48.21 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में व्यय 21.11 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का लगभग 43.8 प्रतिशत था।

पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए अनुदान को ध्यान में रखते हुए प्रभावी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) 15.02 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया। सकल कर राजस्व (जीटीआर) लगभग 38.40 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया और निहित कर-जीडीपी अनुपात 11.8 प्रतिशत है।
6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी आर्थिकी: EYभारतीय अर्थव्यवस्था के चालू और अगले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। अकाउंटिंग कंपनी ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान से कम 5.4 प्रतिशत रहने की बड़ी वजह निजी उपभोग व्यय और सकल स्थिर पूंजी निर्माण में गिरावट है। सितंबर तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर सात तिमाहियों के निचले स्तर पर आ गई थी। इससे पिछली तिमाही में वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत थी।
राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन भारत को राजकोषीय विवेक बनाए रखते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हैं। अपडेट रूपरेखा सरकारी बचत को खत्म करने, निवेश बढ़ाने तथा अधिक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगी।
डीके श्रीवास्तव, मुख्य नीति सलाहकार, ईवाई इंडियारिपोर्ट में कहा गया, 'मांग की एक उल्लेखनीय विशेषता निवेश में सुस्ती है, जैसा कि सकल स्थायी पूंजी निर्माण की वृद्धि में परिलक्षित होता है। इसके अलावा कि निजी निवेश की मांग में तेजी नहीं आई है, सरकार के निवेश खर्च की वृद्धि नकारात्मक रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसमें 15.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।' ईवाई ने अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2047-48 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत के राजकोषीय दायित्व ढांचे में सुधार के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।
इसमें कहा गया कि टिकाऊ ऋण प्रबंधन, सरकारी बचत को खत्म करने तथा निवेश आधारित वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए पुनर्संयोजित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है, जिससे भारत के विकसित अर्थव्यवस्था में बदलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
यह जानकारी वित्त मंत्रालय ने राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबंधन अधिनियम 2003 के तहत प्राप्तियों व व्यय के रुझानों और सरकार के दायित्वों को पूरा करने में विचलन की अर्धवार्षिक समीक्षा पर दी। इसे पिछले सप्ताह लोकसभा में रखा गया था। अर्धवार्षिक समीक्षा में कहा गया, 'सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने पर जोर दिया जाएगा, साथ ही गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा। यह दृष्टिकोण देश के वृहद-आर्थिक बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने में मदद करेगा और समग्र वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा।'
बयानों के अनुसार, बजट 2024-25 यूरोप तथा पश्चिम एशिया में युद्धों के कारण उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितताओं की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया जाएगा। भारत की सुदढ़ वृहद आर्थिक बुनियाद ने देश की वैश्विक अर्थव्यवस्था को, प्रभावित करने वाली अनिश्चितताओं से बचाया है।
कुल व्यय 48.21 लाख करोड़ रुपये अनुमानित
वित्त वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान (बीई) के अनुसार, कुल व्यय करीब 48.21 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें से राजस्व खाते और पूंजी खाते पर व्यय क्रमश: लगभग 37.09 लाख करोड़ रुपये और 11.11 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है। कुल व्यय 48.21 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में व्यय 21.11 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का लगभग 43.8 प्रतिशत था।

पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए अनुदान को ध्यान में रखते हुए प्रभावी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) 15.02 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया। सकल कर राजस्व (जीटीआर) लगभग 38.40 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया और निहित कर-जीडीपी अनुपात 11.8 प्रतिशत है।
6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी आर्थिकी: EYभारतीय अर्थव्यवस्था के चालू और अगले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। अकाउंटिंग कंपनी ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान से कम 5.4 प्रतिशत रहने की बड़ी वजह निजी उपभोग व्यय और सकल स्थिर पूंजी निर्माण में गिरावट है। सितंबर तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर सात तिमाहियों के निचले स्तर पर आ गई थी। इससे पिछली तिमाही में वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत थी।
राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन भारत को राजकोषीय विवेक बनाए रखते हुए सतत विकास को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हैं। अपडेट रूपरेखा सरकारी बचत को खत्म करने, निवेश बढ़ाने तथा अधिक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगी।
डीके श्रीवास्तव, मुख्य नीति सलाहकार, ईवाई इंडियारिपोर्ट में कहा गया, 'मांग की एक उल्लेखनीय विशेषता निवेश में सुस्ती है, जैसा कि सकल स्थायी पूंजी निर्माण की वृद्धि में परिलक्षित होता है। इसके अलावा कि निजी निवेश की मांग में तेजी नहीं आई है, सरकार के निवेश खर्च की वृद्धि नकारात्मक रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसमें 15.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।' ईवाई ने अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2047-48 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत के राजकोषीय दायित्व ढांचे में सुधार के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।
इसमें कहा गया कि टिकाऊ ऋण प्रबंधन, सरकारी बचत को खत्म करने तथा निवेश आधारित वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए पुनर्संयोजित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है, जिससे भारत के विकसित अर्थव्यवस्था में बदलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
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